हाजीपुर का लड़का बना बॉलीवुड का डायरेक्टर।

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 बिहार हाजीपुर -मो इरफान उर्फ बब्बन अंसारी पिता: प्रसिद्ध डॉक्टर अब्दुल रज़्ज़ाक अंसारी ग्राम पोस्ट सिंघाड़ा वैशाली बिहार के एक समाज सेवक और प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे, इन्होंने वैशाली फोटबाल क्लब हाजीपुर से भी खेल और वैशाली ज़िला को कई अवार्ड दिलवाए इसके साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटक में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे, इनकी प्रारंभिक शिक्षा सिंघाड़ा मिडिल स्कूल और सिंघाड़ा हाई स्कूल से हुआ यहाँ भी इरफान अपने क्लास के सहपाठी और शिक्षकों के बीच लोकप्रिय रहे

और लगभग दर्जनों पुरष्कार अपने स्कूल के नाम किया,कुछ दिनों के बाद ये महुआ अपने बड़े भाई कय्यूम अंसारी के दवा के हॉल सेल बिज़नेस संभालने लगे पर अंदर से आर्टिस्टिक मन कुलबुलाने लगा तो पत्र पत्रिका में लेख और कविता लिखने लगे सन 1988 में प्रसिद्ध पत्रिका नंदन में इनकी कविता नन्ही मुनमुन छपा और इरफान लोगों के नज़र में और लोकप्रिय हो गए,फिर महुआ के फुटबॉल क्लब स्टार फुटबाल क्लब के मेम्बर बन गए, और इनके फॉइटबाल के गुरु मिथिलेश सिंह और प्रसिद्ध समाजसेवी अरविंद गुप्ता जी के अथक मेहनत और प्रयास से इरफान दो बार वैशाली डिस्ट्रिक के तरफ़ से वैशाली ज़िला के तरफ से खेला, और वाहवाही लूटी, इसी बीच जामिया मिल्लिया इस्लामिया जो कि आज भारत की नंबर एक यूनिवर्सिटी है का फॉर्म देखा,जहा राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल प्रतियोगिता के टेस्ट में पास होने पर डाइरेक्ट एडमिशन मिला, और इरफान जामिया के लिये फूटबाल का टेस्ट दिया और आल ओवर इंडिया से 5 खिलाड़ियों के चयन में इरफान का नाम आ गया और इरफान का दाखला जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सोशियोलॉजी डिपार्टमेंट में हो गया, और वही मॉस कम्युनिक्सशन और जामिया ड्रामा क्लब में विधिवत अभिनय,फ़िल्म टी वी डायरेक्शन और लेखन की कला सीखा, और वही के स्टूडेंट्स फ़िल्म में लगभग 12 फिल्मो में अभिनय किया और साथ साथ डायरेक्शन में असिस्ट भी किया और जामिया मिल्लिया को कई नेशनल अवार्ड दिलवाया,फिर जामिया के पढ़ाई खत्म करने के बाद वर्ष 1998 में एशिया के नंबर एक अभिनय स्कूल राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय थिएटर इन एजुकेशन में अभिनय सिखा और वही बतौर अभिनय टीचर काम करने लगे इसके साथ साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशल वर्क में सोशल के अस्नातक के छात्र को कम्युनिक्सशन के पेपर पढाने लगे और फिर एक दिन मुम्बई से वास्तु शास्त्र फेम डाइरेक्टर सौरभ नारंग का फोन आया कि मैं राम गोपाल वर्मा के कंपनी में काम कर रहा हूँ तुम मुम्बई आ जाओ और वर्ष 1998 में इरफान मुम्बई चले गए और लगभग दर्जन भर सीरियल में छोटे छोटे रोल किये जिसमे, युग,शांति,वैशाली के नगर वधु,स्टार बेसेलर,हवाएं, कभी कभी, हक़ीक़त,इंडिया मोस्ट वांटेड,भवर,गलती किसकी में सहायक निर्देशक के रूप में काम क्या,इसके अलावा कुछ फिल्मों में भी बतौर सहायक निर्देशक और प्रोडक्शन में काम किया, प्रसिद्ध निर्देशक,मुज़्ज़फर अली,सौरभ नारंग,दिलीप नाइक,अरशद खान, सौरभ सेन गुप्ता, के साथ लगभग 15 सालो तक काम किया,जिसमे प्रमुख प्रोडक्शन हाउस बाला जी टेलीफिल्म्स, जी,यु टीवी,काँटेलो,मेडिटेके,स्टार टीवी सोनी टीवी ज़ी टीवी के साथ काम किया और फिर आमिर खान के अर्थ 1947,वास्तु शास्त्र, द हीरो, मेला,बिरसा मुंडा, एक नवडा दोन बैको, मंथन,उन्माद,मंदाकिनी, युवा,सिस्टर्स हॉलीवुड, मेला, कुछ दिनों के बाद इन्होंने मेडीआक्राफ्ट्स प्रोडक्शन हाउस और फ़िल्म स्कूल खोला और लगभग 2000 से ऊपर टेलेविज़न और फिल्मो के अभिनेता को ट्रेंड किया, और साथ साथ डोकोमेंट्री फ़िल्म,शार्ट फ़िल्म के साथ कई टीवी ऐड भी बनाया, और अभी डीडी के किसान चैनल पे नयी सोच चल रहा है, फिर भोजपुरी फ़िल्म गंगा की लाज जो कि अभी रिलीज़ नही हुई है,के साथ बोहरा सिस्टर,किया उनके काम जज़्बा और टैलेंट को देखकर जामिया यूनिवर्सिटी ने उनको बेस्ट स्टूडेंट आफ जामिया और भारत के बेटा, और कई अवार्डों से नवाजा जा चुका है, इसके अलावा इरफान कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संस्था के उच्च पद पे रहे, इंडो तिब्बत फ्रेंडशिप सोसाइटी,माइनॉरिटी एजुकेशनल ट्रस्ट, तितली, इसको,इस डी ओ ह्यूमैनिटी फाउडेशन, शक्ति वाहिनी, ह्यूमन वेलफेयर ट्रस्ट, कलात्मक ट्रस्ट, के मेंबर भी रहे है।।फाइल फोटो-इरफान उर्फ बब्बन अंसारी