मलिक फाउडेशन ने ईद के मौक़े पे मलाड के सभी मस्ज़िद ए इमाम और उनके परिवार वाले को नये कपड़े भेजे…

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समय समय में सभी समाज में समाज को श्रेनिबद्ध और क्रमबद्ध प्रक्रिया में चलाने के लिए सामाजिक व धार्मिक क्रिया कलाप का सहारा लिया जाता है और इस्लाम की भी बुनियाद पाँच चीज़ पे टीका हुआ है, इस्लाम की बुनियाद पांच अरकानों पर टिकी है। तौहीद (कलमा पढ़ना), नमाज अदा करना, रोजा रखना, जकात अदा करना और हज करना, फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है. इस सबके पीछे सोच यही है कि ईद के दिन कोई खाली हाथ न रहे, क्योंकि यह खुशी का दिन है. जकात और फितरे में बड़ा फर्क ये है कि जकात देना रोजे रखने और नमाज पढ़ने जैसा ही जरूरी होता है,
समाज के सभी वर्ग को एक समान होना चाहिए पर अफसोस आज के लालची और खुदगर्ज़ी मांसिकता के वजह से ये संभव नही हो पाता पर समाज के कुछ कर्मठ और साहसिक युवा समाज शास्त्री व सामजिक संस्था ने इस कथन को गलत साबित कर दिया और समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है, मलाड गणेश नगर की एक सामाजिक संस्था मलिक फाउंडेशन ने, मलिक फाउंडेशन ने एक अलग सोच के साथ मलाड मालवाणी के सभी मस्ज़िद और मदरसे के मौलाना, मुअज़जीम व उनके परिवार के सभी सदस्यों के लिए ईद के मौक़े पे उनके लिए नये कपड़े उनके घर भेजे ताकि मस्ज़िद के मौलाना और उनके परिवार के लोग भी ईद के मौक़े पे नये कपड़े पहन के सेवक खाये और आपस में ईद की खुशिया बांटे, संस्था के अध्यक्ष श्री अख्तर मलिक साहब, चांदनी खाँ, इरफान जामियावाला, इक़बाल खाँ साहब और सभी सदस्यों की इस नई सोच के लिए तारीफ कर रहे है, इलाके के सभी लोग अख्तर मलिक साहब और मलिक फाउंडेशन की सराहना कर रहे हैं, अल्लाह उनके इस नेक काम को कबूल फरमाये और सभी को मलिक फाउंडेशन को साथ देने की तौफ़ीक़ अता करे, …
रिपोर्ट: एम. इरफान, मुंबई.